शनिवार, 24 दिसंबर 2011

नव वर्ष


प्रत्येक नये वर्ष के
आगमन पर हम
यही कहते हैं
नया वर्ष आया
नया सवेरा लाया ,लेकिन
हर बार ही
ऐसा क्यूँ होता है कि
जाग जाने के बावजूद भी
हमारी चेतना पुनः -पुनः
सो जाती है  ?
सतर्कता कहीं गुम हो जाती है
हमारे ही लोग हमें दगा दे जाते हैं
और हम देखते रह जाते हैं
तो जागो दोस्तों

नये वर्ष की दस्तक दरवाज़े पर
सुनाई दे रही है
नये वर्ष को नयी सोच दो
नये वर्ष को नयी बातें  दो

कहो .....अपने आप से ..

रिश्तों की हिफाज़त की
सम्बंन्धों को सरल रखने की
किसी के साथ छल न करने की
अधिकारों के पहले कर्तव्यों की |

कहो  देशवासियों से ....

गोदामों में अन्न न भरने की
विदेशी बैंकों में धन न भरने की
अवैध व्यापार कर दान न देने की
सीमा अवधि पार की दवाइयां न बेचने की |

कहो अपने बच्चों से ...

घोटाला करने वाले मिलते हैं
तो लाल बहादुर शास्त्री भी
यहीं, भारत में ही
पैदा होते हैं |

आतंकवादी पनपते हैं
तो प्रोफ़ेसर डा अब्दुल कलाम भी
इसी देश को
मिलते हैं |

जागरण की बेला है
पुरुषार्थ का समय
चरेवैति-चरेवैति का नाद हो
राष्ट्रहित की फ़रियाद हो ,नव वर्ष पर |

मोहिनी चोरड़िया





शुक्रवार, 23 दिसंबर 2011

मेरा मन और मुस्कान


मेरे भीतर एक आकाश
कई सूर्य ,कई चन्द्र ,कई आकाशगंगाएं
तारों की झिलमिलाहट
उष्णता ,शीतलता ,धवलता कलुषता भी
संवेग ,आवेग, आवेश का फैलाव
तो
प्यार, प्रेम, सुखऔर
आनंद की लहर भी अंदर
इस आकाश से रूबरू होने की
कोशिश में लगी हूँ
बीत रहा है जीवन  दौड़ते भागते
और
जीवन की इस दौड़ में
धीरे-धीरे सब खुल रहे हैं
सामने आ रहे हैं
एक दुसरे पर
हावी भी हो रहे हैं
कौन जीतेगा ?
मैनें मन को कहा
धीरे से,
दुलार से ,
बस एक मुस्कान !
पिघल जायेंगें सब
शांत  हो जायेंगें
जीत जाएगा जीवन |

मोहिनी चोरडिया

मंगलवार, 29 नवंबर 2011

क्वार में


नव उत्सव 
हमारे आँगन आना | 

उमंगों के मेलों को 
चाहत के रेलों को
तुम साथ लाना |

खुशियों की गमक को 
चेहरे की चमक को 
विस्तार दे जाना |

अमावस की रात को 
दीयों की पांत को 
नव आलोक लाना |

पटाखों की लड़ियों को 
बच्चों की फुलझडियों को 
नव उल्लास दे जाना |

हल जोतते भोला को 
खड़ी फसलों को 
नयी मुस्कान दे जाना |

पडौस की बूढ़ी काकी की
अन्दर धंसी आँखों को 
बेटों की चाहत की 
एक झलक दे जाना  |

मोहिनी चोरडिया 
चेन्नई 

ये पल


एक पल प्यार है
एक पल खुमार है
एक पल बयार है
एक पल फुहार है,
कौन जाने,
कब फिसल जाये जीवन की मुटठी से,
क्यों न इसे बांध लें, नयनों के कोने में |


इसी पल ने चाहत दी
इसी पल ने दी खुशी
इसी पल ने बुने गीत
इसी पल में मिला मीत
क्यों न इसे उतार लें हृदय के कोने में |


यह पल चला गया, तो
फिर नहीं आयेगा
यह पल चला गया, तो
मीत रूठ जायेगा
क्यों न उसे पुकार लें, प्यार की गुहार से ।




मोहिनी चोरडिया

सोमवार, 28 नवंबर 2011

क्वार में

 नव उत्सव 
हमारे आँगन आना | 

उमंगों के मेलों को 
चाहत के रेलों को
तुम साथ लाना |

खुशियों की गमक को 
चेहरे की चमक को 
विस्तार दे जाना |

अमावस की रात को 
दीयों की पांत को 
नव आलोक लाना |

पटाखों की लड़ियों को 
बच्चों की फुलझडियों को 
नव उल्लास दे जाना |

हल जोतते भोला को 
खड़ी फसलों को 
नयी मुस्कान दे जाना |

पडौस की बूढ़ी काकी की
अन्दर धंसी आँखों को 
बेटों की चाहत की 
एक झलक दे जाना  |

मोहिनी चोरडिया 
चेन्नई 

रूप तुम्हारा


चम्पा जैसा रंग तुम्हारा
खिला -खिला सा 
सुबह की धूप सा
सुनहरी ,
गंध तुम्हारी जैसे 
गुलाब की कली ने खोल दी हों 
पंखुडियां ,
तुम्हारे सुकुमार चेहरे पर 
अभी -अभी धुले बालों से 
झर रही  पानी की बूंदें 
जैसे छिटकी ओस की बूँदें पत्तों पर 
लगती हैं प्यारी ,
तुम्हारा रूप पावस में नहाया सा ,
या  
खिला हो कमल जैसे ,
अदृश्य  पवन सी तुम 
बहती हो 
एहसास करातीं 
तुम्हारी उपस्तिथि का ,
मेरा मन तुम्हें 
अपना बना लेता है 
तुम्हें देखना चाहता है 
बिलकुल वैसा ही 
जैसा मैनें तुम्हें देखा था 
बरसों पहले 
जब तुम निकल रहीं थीं 
बाहर,  
कॉलेज की लाइब्रेरी से |

मोहिनी चोरडिया