मंगलवार, 29 नवंबर 2011

क्वार में


नव उत्सव 
हमारे आँगन आना | 

उमंगों के मेलों को 
चाहत के रेलों को
तुम साथ लाना |

खुशियों की गमक को 
चेहरे की चमक को 
विस्तार दे जाना |

अमावस की रात को 
दीयों की पांत को 
नव आलोक लाना |

पटाखों की लड़ियों को 
बच्चों की फुलझडियों को 
नव उल्लास दे जाना |

हल जोतते भोला को 
खड़ी फसलों को 
नयी मुस्कान दे जाना |

पडौस की बूढ़ी काकी की
अन्दर धंसी आँखों को 
बेटों की चाहत की 
एक झलक दे जाना  |

मोहिनी चोरडिया 
चेन्नई 

ये पल


एक पल प्यार है
एक पल खुमार है
एक पल बयार है
एक पल फुहार है,
कौन जाने,
कब फिसल जाये जीवन की मुटठी से,
क्यों न इसे बांध लें, नयनों के कोने में |


इसी पल ने चाहत दी
इसी पल ने दी खुशी
इसी पल ने बुने गीत
इसी पल में मिला मीत
क्यों न इसे उतार लें हृदय के कोने में |


यह पल चला गया, तो
फिर नहीं आयेगा
यह पल चला गया, तो
मीत रूठ जायेगा
क्यों न उसे पुकार लें, प्यार की गुहार से ।




मोहिनी चोरडिया

सोमवार, 28 नवंबर 2011

क्वार में

 नव उत्सव 
हमारे आँगन आना | 

उमंगों के मेलों को 
चाहत के रेलों को
तुम साथ लाना |

खुशियों की गमक को 
चेहरे की चमक को 
विस्तार दे जाना |

अमावस की रात को 
दीयों की पांत को 
नव आलोक लाना |

पटाखों की लड़ियों को 
बच्चों की फुलझडियों को 
नव उल्लास दे जाना |

हल जोतते भोला को 
खड़ी फसलों को 
नयी मुस्कान दे जाना |

पडौस की बूढ़ी काकी की
अन्दर धंसी आँखों को 
बेटों की चाहत की 
एक झलक दे जाना  |

मोहिनी चोरडिया 
चेन्नई 

रूप तुम्हारा


चम्पा जैसा रंग तुम्हारा
खिला -खिला सा 
सुबह की धूप सा
सुनहरी ,
गंध तुम्हारी जैसे 
गुलाब की कली ने खोल दी हों 
पंखुडियां ,
तुम्हारे सुकुमार चेहरे पर 
अभी -अभी धुले बालों से 
झर रही  पानी की बूंदें 
जैसे छिटकी ओस की बूँदें पत्तों पर 
लगती हैं प्यारी ,
तुम्हारा रूप पावस में नहाया सा ,
या  
खिला हो कमल जैसे ,
अदृश्य  पवन सी तुम 
बहती हो 
एहसास करातीं 
तुम्हारी उपस्तिथि का ,
मेरा मन तुम्हें 
अपना बना लेता है 
तुम्हें देखना चाहता है 
बिलकुल वैसा ही 
जैसा मैनें तुम्हें देखा था 
बरसों पहले 
जब तुम निकल रहीं थीं 
बाहर,  
कॉलेज की लाइब्रेरी से |

मोहिनी चोरडिया