शुक्रवार, 13 जनवरी 2012

सूरज रे !तुम जलते रहो

हे !शक्ति पुंज
तुम ओज भरो
तुम ज्ञान भरो
अज्ञान हरो
सूरज रे !तुम जलते रहो  |

हे !ऊर्जा पुंज
तुम तेज भरो
 तिमिर हरो
आलोक भरो
सूरज रे !तुम जलते रहो  |

हे ! आदित्य ह्रदय
 तुम बाहों में,
 धरती को लेकर
 धन्य करो
सूरज रे !तुम जलते रहो  |

हे !जगतपिता, तुम परमेश्वर
तुम ही सत्य
तुम ही सुन्दर
इस जगती की पीड हरो |
सूरज रे !तुम जलते रहो  |

मोहिनी चोरड़िया

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